Translate

Thursday, 31 December 2015

Tuesday, 21 July 2015

............................................................Hamid Chauhan

Tuesday, 10 March 2015

भटकती आत्मा 

रवि पेशे से सिविल इंजीनिअर है। हाल ही में वह कुछ रोज पहले ही जयपुर से नॉएडा आकर एक किराये के फ्लैट में आकर रह रहा था। वह एक एम इन सी कंपनी में  नौकरी  कर रहा था। एक रोज वह ऑफिस में ज्यादा काम के चलते काफी लेट हो गया था। वह थका हारा रात को करीब दस बजे अपने फ्लैट में पहुंचा और सोने की कोशीश करने लगा लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। करीब एक बजे वह परेशान होकर अपने फ्लैट की बालकनी में टहलने लगा तो की


उसकी नजर सामने की तरफ दूसरी बिल्डिंग के फ्लैट 3-A पर पड़ी तो उसने देखा एक बहुत खूबसूरत लड़की हाथ में गिलास लिए कुछ पी रही थी और उस लड़के की और देख रही थी, जैसे ही उसने गौर से देखा तो वो लड़की एकदम से गायब सी हो गयी। रवि ये सब देखकर बेचेंन सा हो गया वह लड़की बार-बार दिखती और फिर गायब हो जाती! आखिर इसी सिलसिले में सारी रात बीत गयी वो कुछ समझ नहीं पा रहा था। सुबह होते ही वो सामने वाली बिल्डिंग के उसी फ्लैट में गया और डोर  बैल बजायी तो एक लड़का उस फ्लैट से निकला और बोला हाँ जी किससे मिलना है. रवि उस लड़के को देखकर सन्न रह गया और बड़बड़ाते हुए बोला मुझे देव से मिलना है. उस लड़के ने कहा यह कोई देव नहीं रहता आपको शायद कोई गलतफैमी हुई होगी. रवि चुपचाप वापस आकर अपने  सोफे पर बैठ गया. अगली रात वह लड़की फिर दिखाई दी और ही वो सुदबुद खोकर उसकी और दौड़ने लगा. पहुंच कर देखा तो उसके फ्लैट पर ताला लटका मिला और जैसे ही उसने लिफ्ट  की तरफ देखा तो वही लड़की लिफ्ट में जाती दिखाई दी उसने लिफ्ट को रोकने के लिए सारे बटन दबा दिए लेकिन लिफ्ट सीधे नीचे जाकर रुकी। वो सीढ़ियों से नीचे पहुंच तो उसे चारो तरफ कुछ नहीं दिखाई दिया बस एक तेज़ जाती कार की आवाज सुनाई दी सू.....
रवि अब शायद यह समझ गया था की उसके साथ कोई अनहोनी होने वाली है. रवि को रात को आया सपने भी पूरा होता दिखाई दिया उसने  सपने में अपने आप को टेर्रिस से नीचे गिरते हुए  देखा था  उस लड़की ने उसको नीचे फेंका था.
रवि को अक्सर हर रात में सिर्फ एक आवाज सुनाई देती थी। दीपक दीपक।
इसी कारण उसने अपने फ्लैट के पडोशी दीपक से बात करकर मामले को जानने की कोशिस की और जाकर

रवि ने अपने पड़ोसी (दीपक ) को अपने साथ हुई घटना  के बारे में बताया तो दीपक ने सिगग्रेट  का धुआं छोड़ते हुए
हाँ वो लड़की मुझे ही पुकारती है  और चिल्लाकर कहा याद करो वो रात जब मेरी बीवी ड्यूटी से वापस घर आ रही थी और तुम चारों दरिंदो ने उसकी अस्मत लूटी थी. जिसके बाद उसने आत्महत्या कर ली थी लेकिन उसकी आत्मा को शान्ति नहीं मिली हम दोनों ने मिलकर तुम्हारे तीनो साथियो को तो मार डाला अब तुम्हारी बारी है.  और सुनो तुम्हे यहाँ तक लाने वाला में ही हूँ रवि यह सुनकर हैरान रह गया. एकदम तेज आंधी में वो लड़की आई उसे देखकर  रवि भागने लगा लेकिन बच नहीं पाया। कुछ पलो के बाद ही उसकी लाश बिल्डिंग के नीचे पड़ी थीं।



Monday, 9 March 2015

अक्सर लोग जल्दबाज़ी में शार्टकट लेते है, लेकिन कई बार  इसका अंजाम बुरा होता  है - हामिद चौहान 

cstku pht+ksa dks cnuke djus osQ rjhosQ fdrus vklku vkrs gSa------A 

yksx lqurs gS Nqi&Nqi osQ ckrs] vkSj dgrs gSa fd nhokjksa osQ Hkh dku gksrs gSa-----AA


Sunday, 8 March 2015

Mahnat karne walo se kamyabi kabhi door nahi rahti

Friday, 6 March 2015

अनहोनी 

murga baangh de rha h. Aas pados se logo Ki awaaz aa rhi h jaise sab charcha Kr rhe h. Kisi anhoni Ki asanka ke saath me utha or ghar ke bhaar dekha to logo Ki bheed or poochhtach krti police ye dekhkar to maano me hakka-bakka rh gya kyonki wo sab mere best friend sameer ke saath Hua jo kl hi Dubai Jane wale tha wha nokri krne ke liye. Uski aarthik sthithi bhut hi khrab thi. Jo kuchh Dino se wo kafi preshan dikh rha tha or bank ke chakkar lga rha tha loan lene ke liye. Kaafi masakkat ke bad uska loan pass ho paya tha. Do din phle hi Sameer mujhe Mila tha uske chehre par kaafi Dino baad aasha ke bhav the sayad use apne aap se bahut saari ummide thi. Lekin zindagi har mod par imtihaan leti h or aaj phirse wo ghahre sadme me ja phucha tha. Usne btaya Ki der raat kuchh hathiyar band lootere uske ghar me ghus kar saare rupye le gye or usko bhir se backfoot par lakr khda Kr diya ab tk to uske apni or parivaar Ki chinta thi lekin ab bank ke loan Ki bhi chinta badh gyi thi. Aaj mujhe pata chala zindagi badi kharab cheez hoti h. Saali kabhi bhi palat sakti h.
dosto ye ek sachchi kahani hai.
apne comment zaroor de

Sunday, 1 March 2015

भयानक रात 

 हर रोज की तरह आज फिर देर शाम अपने दफ्तर से निकला था. बहार काफी तेज बारिश हो रही थी. मेने पार्किंग से गाड़ी निकली और घर की तरफ चल निकला। कुछ दूर  चलने के बाद हाइवे पर एक सूनसान इलाके में कार अचानक


 खराब हो गयी मानो  दूर दूर तक कुछ भी दिखाई नहीं  था मैने कई गाड़ियों को हाथ दिया पर  किसी ने भी गाड़ी नहीं रोकी। तेज होती बारिश ने मुझे पूरी तरह से भिगो दिया था. में  कार को वही छोड़ कर किसी आशियाने की तलाश करने लगा. कुछ दूर चलकर एक खण्डार जैसा पुराना मकान दिखाई दिया मै  किसी तरह हिम्मत करके उस मकान के पास गया और 'कोई है' 'कोई है' करके आवाज़ लगाने लगा पर वहां से कोई जवाब नही आया. दरवाज़ा खुला होने पर भी अंदर कोई नहीं था ये देखकर में बुरी  तरह डर गया. पर करता  क्या बारिश से बचने के लिए मै अंदर चला गया और  मैंने जो अंदर देखा उसे देख कर मेरी चीख निकल गयी.…। ……।


कमरे की हर दीवार पर खून के धब्बे थे. जैसे ही हड़बड़ाहट बाहर निकलने के लिए दौड़ा तो पैर में कुछ अटकने की वजह से मैं गिर गया उसके बाद जो मैंने अपने मोबाइल की टोर्च  जलाकर देखा तो वहां पड़ी लाशें  और कंकाल ने सारी कहानी बयां कर दी. मानो सालो से इकठ्ठा की गयी लाशे हो. तभी मैं  वापस  हाइवे की तरफ भागने लगा और हाँफते हाँफते-हाँफते सड़क के किनारे जा पहुँचा एक तेजी से आती हुई कार आकर मेरे सामने रुकी और मैं उस में तेज़ी से दरवाज़ा  कर बैठ गया और आँखे बंद करके अपनी दिल की धड़कनो को सुनने लगा तभी मैने  आँखे खोलकर कार की अगली पर देखा तो कार  अपने आप चल रही थी.  नजारा देख कर मेरी मेरी चीख निकल गयी और जैसे ही में गाड़ी से नीचे कूदना चाहा वह कार तेजी से बहती नदी में जा गिरी, और अचानक आँख खुली तो मेरी बीवी हाथ में पानी का जग लिए मेरे उपर पानी डाल कर कह रही थी आज दफ्तर नहीं जाना क्या? मेने कहा थैंक गॉड डरावना सपना था।
दोस्तों मेरी कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएगा।